ध्यान की सर्वोत्तम पद्धति

पद्धतियाँ हज़ारों हैं, लाखों हैं। जो तुम्हारी अवस्था है उसके हिसाब से पद्धति है। और ध्यान की तुम्हारे लिए उचित पद्धति क्या है, ये तुम्हें ध्यान ही बता सकता है। या तो तुम्हारा ध्यान, या किसी और का ध्यान।

मैं चाहता हूँ कि ध्यान तुम्हारा ऐसा रहे, कि जब वो टूटने लगे, तो तुम्हें पद्धति बता दे बचने की।

ऑटो-रिपेयर (स्व-चालित सुधार) की उसमें सुविधा रहे। जैसे शरीर में होती है न, कि शरीर में चोट लगती है…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org