धोखा देकर शारीरिक संबंध बनाने वाले

प्रश्न: मैं एक संबंध में थी। उसका आकर्षक व्यक्तित्व, प्यारी बातें और कई तरह के किस्सों के फेर में आ गई। अब पता चल रहा है कि जो कुछ वो अपने बारे में बताता था, वो ज़्यादातर तो झूठ था। दुःख से ज़्यादा मुझे शर्म और बेज़्ज़ती महसूस हो रही है कि मेरे शरीर का इस्तेमाल किया गया। मेरी कहानी, यहाँ तक कि कुछ फोटोज़ भी इधर-उधर फैला दिए गए हैं। मैं डिप्रेस्ड हो चुकी हूँ और आत्महत्या का ख़याल आता है।

आचार्य प्रशांत: तुमने ऐसा क्या अपराध कर दिया है जो तुम अपने आप को जीने के क़ाबिल नहीं समझतीं? कोई था, चतुर, कुटिल आदमी; उसने अपने बारे में झूठ बोला और कुछ लच्छेदार बातें करी होंगी, और तुम फँस गईं। अब कुछ लोग हैं जिन तक तुम्हारी कहानी पहुँच गई है, तुम्हारी कुछ तस्वीरें इधर-उधर फैला दी गईं हैं, इसमें तुम कहाँ से नंबर-१ की गुनहगार हो गईं भई? ग़लती तुम्हारी भी है, मैं उस पर आऊँगा, पर सबसे बड़ी ग़लती जिनकी है वो तो कोई और है, तुम अपने आप को क्यों सज़ा दे रही हो?

ये शर्म और बेइज़्ज़ती तुम्हें किस बात पर लग रही है कि कोई तुम्हारे शरीर का इस्तेमाल करके चला गया? शरीर चीज़ क्या है? कल राख हो जानी है। पर तुम ऐसे बता रही हो जैसे तुम्हारी कितनी बड़ी दौलत लुट गई। क्या चीज़ है शरीर? अभी लग जाएगा वायरस तो देख लेना। इसी शरीर को बाँध देते हैं प्लास्टिक में और कोई छूने भी नहीं आता। जलाने भी तुमको ले जाएँगे तो लोग दूर-दूर खड़े होंगे, ये है शरीर। कोई मूर्ख मिला था तुम्हें, जिसकी कुल बुद्धि, कुल नियत इतनी ही थी कि वो तुम्हारे शरीर को भोग गया, इस बात से तुम में क्यों डिप्रेशन छा रहा है? तुम सिर्फ़ शरीर हो क्या?

ये ग़लती है तुम्हारी कि तुमने अपने आप को सिर्फ़ देह मान रखा है। तुम्हें लग रहा है कि — “मैं हूँ ही क्या! मैं एक शरीर हूँ और मैं अपने आप को बचा करके रखी थी, कोई आया और मेरी संपदा लूटकर ले गया। मैंने बड़ी सहेज कर रखी थी”। किसके लिए सहेज कर रखी थी? प्रियवर के लिए? किसके लिए? हम सोचते हैं कि हमने जो अपने जिस्म की दौलत है, वो बिल्कुल बचा कर रखी है, आएगा कोई दिलराज, उसको हम अर्पित करेंगें। दिलराज तो नहीं आता पर यमराज ज़रूर आ जाता है। दिलराज तो छलावा है, किसी को नहीं मिला; यमराज हकीक़त है, वो सबको मिल जाता है।

इतनी बड़ी भारी तुम्हारे साथ त्रासदी हो गई कि तुम आत्महत्या की सोचने लग गईं? तुम्हारा जीवन इतना फ़िज़ूल है? एक फ़िज़ूल आदमी तुम्हारी ज़िंदगी में आता है, तुम्हारे साथ कुछ फ़िज़ूल की हरकतें करता है, और तुम आँसुओं में डूबी हुई हो कि — “अरे! मैं डिप्रेस्ड हो गई।” तुम्हें तो खुशखबरी सुनानी चाहिए कि एक व्यर्थ का आदमी आ गया था जीवन में, अब वो दफ़ा हो गया है, और बहुत छोटी क़ीमत पर दफ़ा हुआ है वो। इतना ही करा न उसने कि तुम्हारे शरीर का थोड़ा…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org