धर्म — एक भी, अनेक भी

धर्म — एक भी, अनेक भी

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा प्रश्न ये है कि स्वधर्म क्या है? आपकी किताब ‘भगवद्गीता’ में मैंने पढ़ा था कि सबके लिए अपना-अपना स्वधर्म है। तो आपने वहाँ एक मैथ्स कोऑर्डिनेट (निर्देशांक) के साथ एनालॉजी (समानता) लेकर समझाया था कि भीष्म पितामह हो सकता है कोई एक्स वन वाई वन कोऑर्डिनेट पर हैं, और उनको ज़ीरो-ज़ीरो — जो केंद्र है उस पर आना है; अर्जुन किसी और केंद्र पर खड़े हैं और उनको भी जो मेन ओरिजिन है उस पर आना है। तो हमारे लिए हमारे जीवन में…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org