दुर्योधन की जीत में भी हार, अर्जुन की हार में भी जीत

दुर्योधन की जीत में भी हार, अर्जुन की हार में भी जीत

आचार्य प्रशांत: तो पहले अध्याय का दोहराव हमने पिछले सत्र में पूरा करा, ‘विषादयोग’। अर्जुन भ्रमित हैं, दुखी हैं और लगभग निश्चय कर चुके हैं कि मैं नहीं लड़ूँगा। और न लड़ने के पीछे जो दो तत्व वो बता रहे हैं, वो क्या थे मोटे तौर पर? वृत्तियाँ और?

श्रोता: मोह।

आचार्य: मोह तो वृत्ति में ही आ गया। वृत्ति और संस्कृति। ठीक है न? दो बातों का आश्रय लेकर के…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org