दुनिया में इतने कम कबीर क्यों?

करोड़ों कबीर हो जाते, पर हर कबीर के पास वैसा ही घर था और वैसे ही रिश्तेदार, और वैसे ही शुभ-चिंतक और हितैषी जैसे आप के पास हैं, तो हो ही न पाए।

कबीर, कबीर कैसे हो? यदि कबीर को बता दिया जाए कि कबीर एक असंभावना है, हो ही नहीं सकते, हजारों जन्म लग जाते हैं, कबीर तो वो जिन्होंने कहा कि ‘बात की बात में राम हाजिर’, अभी-के-अभी।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org