दुनिया में अपनी भूमिका कैसे निभाएँ?

हे राघव! अंदरूनी रूप से सभी इच्छाओं को त्याग दो, आसक्तियों और आवृत वृत्तियों से मुक्त हो जाओ, सब कुछ बाहरी रूप से करो। इस प्रकार दुनिया में अपनी भूमिका निभाओ।
~ योगवासिष्ठ सार

प्रश्नकर्ता: इस स्थिति में कैसे रहें और दुनिया में क्या भूमिका हो?

आचार्य प्रशांत: यह स्थिति तय कर देगी कि दुनिया में आपकी क्या भूमिका होगी। वो स्थिति प्राथमिक है, आप उसकी लगन लगाएँ; भूमिका बाद में आती है। आप शांत हो गए, अब आपकी शांति तय करेगी कि आपको क्या करना है। आप पहले से थोड़े ही तय करेंगे कि, “शांत होकर फिर मैं क्या करूँगा।”

एक स्थिति में रहकर दूसरी स्थिति की कल्पना व्यर्थ होती है। आप जब शांत होते हो तो पता होता है कि आप गुस्से में आकर क्या कर जाओगे? शांत हो करके कभी आपने सोचा है या योजना बनायी है कि, “गुस्से में आ करके अपना सर फोड़ूँगा”? ऐसा तो होता नहीं, क्योंकि शांत हो तो कुछ पता ही नहीं गुस्से का। वो आदमी दूसरा है जो गुस्से में आएगा, तुम्हें उस आदमी का कुछ पता नहीं। कहने को मानसिक स्थिति बदली है पर वास्तव में अंदर से जैसे आदमी ही बदल गया हो। वो आदमी क्या करेगा तुम्हें क्या पता।

ठीक उसी तरीके से जो अभी शांत नहीं है, उसे बिलकुल नहीं पता कि जब वो शांत हो जाएगा तो क्या करेगा। लेकिन हम यह भूल खूब करते हैं, और यह भूल हमारी अशांति को बचाए रखने का साधन बन जाती है। हम कहते हैं, “अगर शांत हो गए, तो फिर तो पक्का है कि ये, ये और ये करेंगे नहीं। तो फिर करने को कुछ बचेगा ही नहीं क्योंकि यही सब तो हम जानते हैं करना, और ये सारे काम हमारे हो ही अशांति में सकते हैं। तो फिर तो हम बेरोज़गार हो गए। अरे! भाड़ में जाए शांति। ऐसी शांति का क्या जो भूख से मार दे!” और फिर सत्संग ख़त्म, ग्रन्थ…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org