दुःख — सुख की स्मृति

संसार के दो लक्षण:

पहला - सुख की उम्मीद खूब देगा, सुख नहीं, क्योंकि वास्तविक सुख तो आनंद है। वो संसार नहीं दे पाएगा।

हम आमतौर पर जिसे सुख बोलते हैं, उसे ध्यान से देखिये। क्या वो कभी पूरा होता है? कोई ऐसा सुख मिला है आपको जिसने भविष्य को ख़त्म कर दिया हो? क्या कोई ऐसा सुख उपलब्ध हुआ है आपको जिसके आगे और सुख पाने की आशा न बचे? समय कायम रहता है न? भविष्य कायम रहता है न? आपको कितना भी सुख मिल जाए, ‘और’ की…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org