दुःख में याद रहे, सुख में भूले नहीं

दुःख में सुमिरन सब करै, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करै, तो दुःख काहे को होय।।

संत कबीर

प्रश्न: आपने कई बार कहा है कि सुख, दुःख अलग-अलग नहीं, पर यहाँ पर कबीरदास कहते हैं कि सुख के क्षणों में याद करने से दुःख से बचना हो जाएगा। उसका आशय क्या है?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org