तुम 'कूल' कैसे हो गए?

प्रश्नकर्ता: सर आप 'कूल' लोगों का एकदम बाजा बजा देते हो। तो सवाल मेरा यह है कि आप कूल लोगों की इतनी बजाते क्यों हैं? उनकी इतनी बेइज्जती क्यों करते हैं?

आचार्य प्रशांत: 'कूल' माने क्या? 'कूल' के आध्यात्मिक अर्थ हो सकते हैं। कृष्ण अर्जुन को गीता में कहते हैं — तू विगत ज्वर हो जा। उसे सिखाते हैं विगत ज्वर होना। विगत ज्वर समझते हैं? ज्वर माने, बुखार। बुखार माने हॉट (गर्म)। विगत ज्वर माने कि अब जिसको बुखार नहीं चढ़ता। माने जो 'कूल' हो गया। तो वही कह रहे हैं अर्जुन को — तू 'कूल' हो जा।

पर फिर कूल होने का जो असली मतलब है वो हमें पता तो हो। जिसको अब ज्वर नहीं चढ़ता; ज्वर…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org