तुम कमज़ोर हो, इसलिए लोग तुम्हें दबाते हैं

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैं बचपन से एक धार्मिक परिवार में पला बढ़ा हूँ। बचपन से पूजा-पाठ हमारे घर में चलती थी, रामायण-महाभारत हमारे घर में चलता था तो उन सब का देखा-देखी मैं भी सब से रामायण महाभारत देखकर सबके साथ शेयर (साझा) करता था तो लोग खुश होते थे और मुझे भी एक तरह का प्रोत्साहन मिलता था। पर जैसे-जैसे मैं जीवन में आगे बढ़ा, ग्यारहवीं-बारहवीं में आया तो इन चीजों से अरुचि हो गई। अब पिछले साल लॉकडाउन के कारण मैं घर में रहा तो काफी फ्री टाइम (खाली समय) था मेरे पास। उस फ्री टाइम में मैंने आपके वीडियोज़ और लेक्चर सुनना शुरू किया। मेरा फिर से स्पिरिचुअलिटी (अध्यात्म) की तरफ ध्यान…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org