तुम्हें बहुत दुःख हो,

उससे हटने का एक ही तरीका है −

उचित कर्म में उतर जाओ।

तुम्हारे सामने पहाड़ जैसी

चुनौतियाँ, समस्याएँ, दुःख खड़े हों,

तुम उचित कर्म करने लग जाओ।

भले ही वो उचित कर्म उस

पहाड़ के सामने छोटा-सा हो,

पर वो छोटा-सा उचित कर्म

पहाड़ जैसे दुःख पर भारी पड़ेगा!

~ आचार्य प्रशांत

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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