तुम्हारे ही केंद्र का नाम है गुरु

गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोबिंद दियो मिलाय।।

~ संत कबीर

प्रश्नकर्ता: गुरु और गोविंद में क्या फ़र्क कहा गया है और उससे क्या अभिप्राय है? क्या यह कहा जा रहा है कि गुरु और गोविंद दोनों हैं, तो पहले गुरु के चरण स्पर्श किए जाएँगे और फिर गोविंद के? बात अबूझ सी लगती है। कृपया समझाएँ।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org