तुम्हारा सबसे अंतरंग सम्बन्ध

स्रोत से एक गहरा रिश्ता होना बहुत महत्वपूर्ण है। यह एक कॉन्सेप्ट भर नहीं हो सकता है। आप जो चाहें- वाहे गुरु, अल्लाह- हमने अभी माँ बोला, कभी स्रोत बोला, कभी परम बोला या सत्य, जो भी बोलिये उसके साथ एक रिश्ता होना बहुत ज़रूरी है। अगर आपका उसके साथ कोई रिश्ता नहीं है तो आपकी अनाथ जैसी हालत रहेगी। अनाथ समझते हो, ‘अनाथ’ मतलब वही जिसका नाथ से कोई रिश्ता नहीं। मैं सबसे एक सवाल पूछ रहा हूँ क्या आपका कोई रिश्ता है, व्यक्तिगत रिश्ता, परम के साथ? कोई…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org