डर को कैसे छोड़ें

हमरी करो हाथ दै रक्षा॥

पूरन होइ चित की इछा॥

तव चरनन मन रहै हमारा॥

अपना जान करो प्रतिपारा॥

~ चौपाईसाहब (नितनेम)

अर्थात, हे! अकाल पूरक, अपना हाथ देकर मेरी रक्षा करो। मेरी मन की यह इच्छा आपकी कृपा द्वारा पूरी हो कि मेरा मन सदा आपके चरणों में जुड़ा रहे। मुझे अपना दास समझकर मेरा हर तरह प्रतिपालन करो।

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org