डर आता है क्योंकि तुम उसे बुलाते हो

सारा डर मूलत — यह है कि; मेरा कुछ छिन सकता है, मैं कम हो सकता हूँ और अंततः मैं ख़त्म हो सकता हूँ।

मूल रूप से सारा डर यही है और यही कारण है कि डर आदि-काल से मनुष्य की गहरी-से-गहरी वृत्तियों में से है। आदमी हमेशा डरा हुआ रहा है, यह आज की बात नहीं है। हर काल में, हर स्थान पर, हमारा जीवन बस डर की ही कहानी रहा है। हमने जो कुछ किया है, डर के…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org