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झुको तो बस एक के आगे || आचार्य प्रशांत

सर जब झुकना ही है तो सही जगह झुके ना सर झुके ना ऐसा तो हो नहीं सकता जो बोलते हैं कि साहब हम किसी से नहीं झुकते झुके तो वो भी हुए हैं बड़े पदवियों के सामने झुकेंगे बड़े पैसे के सामने झुकेंगे बड़े खौफ के सामने झुकेंगे अंत में मौत के सामने झुकेंगे कोई बोले मैं झुकता नहीं ये संभव है क्या जीव होना माने झुक के जीना बहुत अकड़ के भी जिओगे तो मौत तो आएगी। तो यमाचार्य के सामने तो झुकना ही पड़ेगा। या जब वो बोलेंगे कि चलो तो बोलोगे हम नहीं आते। अभी नींद आ जाए नींद के सामने झुकना पड़ेगा। कोई बीमारी लग जाए बीमारी के सामने झुकना पड़ेगा। बाल सफेद होने लगे। अड़ सकते हो क्या? सफेद नहीं होगा तुम। आज्ञा दे रहा हूं। प्रकृति के आगे झुकना पड़ा कि नहीं झुकना पड़ा? भूख लगी खाना पड़ा। रुको जरा सांस देखें कितनी देर तक रोकते हो अभी झुकना पड़ेगा बताओ किसी और के आगे नहीं अपने ही फेफड़ों के आगे झुकना पड़ा जो इस तरह झुकने से बिल्कुल ऊब जाते हैं वो कहते हैं अगर झुकना ही है तो एक जगह झुकूंगा फिर कहीं नहीं झुकूंगा इसे कहते हैं युक्त होना युक्त होना आ रही है बात समझ मौत के आगे भी नहीं झुकते। सांचे गुरु का बालका मरे ना मारा जाए। वैद मुआ रोगी मुआ मुआ सकल संसार मरे हम नहीं मरते। कबीरा ना मरे जाके राम आधार। अकर्ता अमर हो जाता है। कर्ता कर कर के मौत को पाता है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

Written by आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org