ज्ञान और भक्ति में क्या श्रेष्ठ?

ज्ञान और भक्ति में क्या श्रेष्ठ?

निर्पंथी को भक्ति है, निर्मोही को ज्ञान। निर्द्वंद्व को मुक्ति है, निर्लोभी निर्वाण।। ~ कबीर साहब

आचार्य प्रशांत: चार हिस्से हैं इसके, चारों को अलग-अलग बोलिए। एक आदमी पहले एक ही बोले, फिर अगला दूसरा।

“निर्पंथी को भक्ति है” — क्या अर्थ हुआ?

प्रश्नकर्ता१: सर, यहाँ निर्पंथी से अर्थ होता है किसी धर्मविशेष पर विश्वास न रखने वाला, स्वधर्म पर चलने वाला। जो अपनी…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org