जो नहीं समझे वो चूके,जो समझे वो और भी चूके

प्रश्नकर्ता: सर, सब कुछ अगर छवि ही होता है, तो जो समझ में आता है, जैसे आपकी बात सुनना, वो भी समय की प्रक्रिया है। क्या ऐसा होता है, एक छवि या कुछ छवि बाकि सारी छवियों को मिटा सकती हैं?

आचार्य प्रशांत: देखिये, इस बात को स्वीकार करना आसान होगा कि संसार में ही कुछ छवियाँ होती हैं जो कि दूसरों से बेहतर होती हैं, जो दूसरों की काठ होती हैं। कुछ छवियाँ ऐसी होती हैं जो कि आपको छवियों से मुक्त कर…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org