जो जानता हूँ उस पर अमल क्यों नहीं कर पाता

प्रश्नकर्ता: आपसे और जगह-जगह से ऐसी बातें सुनता हूँ पर जब अपनी ज़िन्दगी में उतारने की कोशिश करता हूँ तो बहुत सारी ऐसी चीज़ें आती हैं जो रोकती हैं, इसकी वजह क्या है?

आचार्य प्रशांत: देखो, हर आदमी के भीतर दो आदमी होते हैं, एक असली आदमी, और एक नकली आदमी। और ध्यान न दो तो पता नहीं चलता कि कौन-कौन है? ये दोनों एक ही जैसे दिखते हैं, इनका एक ही नाम होता है। इनमें अंतर इतना ही होता है जितना कि एक आदमी…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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