जीव भाव तमाम तरह की हिंसा का कारण है

प्रश्नकर्ता: जीव क्या है और हम जीवों की हत्या क्यों करते हैं?

आचार्य प्रशांत: जीव वह है जो अपने आप को शरीर मानता है। जीव वह है जो अपने आप को जीवित कहता है, जन्म के फलस्वरूप। जीव वह जिसका जन्म है, जीवन है, मृत्यु है।

जीव कौन?

जो अपने आप को मानता है देह और चूँकि अपने आप को कहता है कि मैं देह हूँ तो देह की आवश्यकता की पूर्ति के लिए वह कुछ भी करेगा

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org