जीवन में सीखें कैसे?

पढ़िए, स्वाध्याय करिए और दैनिक जीवन के प्रति सतर्क रहिए। दो ही तरीके से आदमी की मदद हो सकती है — या तो अपनी मदद खुद कर ले या फिर बाहर जहाँ-जहाँ से मदद मिल रही हो उसका लाभ उठाए।

पहली कोशिश तो यही है कि अपनी मदद जितनी ज़्यादा से ज़्यादा कर सकते हो, करो। जब अपनी मदद की बिल्कुल अधिकता पर पहुँच जाओगे, सीमा पर पहुँच जाओगे, तब फिर बाहर से भी मदद आने लगती है और आप इस योग्य भी हो जाते हैं कि बाहर से जो मदद आ रही हो उसको पहचान पाएं, उसक…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org