जीवन- धर्मों का धर्म

धर्म कभी अलग-अलग हो ही नहीं सकते। धर्मों के नाम अलग-अलग हो सकते हैं, पर धर्म कभी अलग नहीं हो सकते।

होता क्या है कि धर्म सिर्फ रौशनी की तरह है, लेकिन वो रौशनी कभी इस सीएफएल से निकलती है, कभी दिये से निकलती है और दीयों का प्रकार भी १००० तरीकों का होता है, कभी सूरज से निकलती है, कभी कहीं और से। जब तक रौशनी रहती है तब तक तो ये स्पष्ट होता है कि ये रहा दिया और ये रही उसकी ज्योति और इससे आ रही थी रौशनी और सबको स्पष्ट होता है कि…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org