जीना माने क्या?

क्या जीवन का अर्थ यही है- उठना, बैठना, खाना, पीना, चलना, सोना और मर जाना? क्या यही जीवन है, या जीवन कुछ और भी है, इसके अलावा, इसके परे, इससे आगे? समझेंगे इसको।

यह तुम जो कुछ भी कर रहे हो, या जो ये सब दिखाई देता है, भौतिक रूप से, याद रखना एक अच्छा यंत्र भी ये सब कुछ कर सकता है| अगर तुम अपनी भौतिक, जैविक क्रियाओं को ही जीवन समझ रहे हो, तो याद रखना एक ऐसा यंत्र बनाया जा सकता है जो साँस ले।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org