जिन्हें ताकत चाहिए, वे ज़िम्मेदारी स्वीकारें

जो भी तुम्हें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से कमज़ोर बनाए, उसे ज़हर की तरह त्याग दो।

~ स्वामी विवेकानंद

जो बल तुम्हें ध्यान की ओर न ले जाए, वो बल ही झूठा है। यदि कोई सत्य की बात करता हो और उसमें बल न हो, तो समझ जाओ कि वो झूठ में जी रहा है।

प्रेम कोई मुलायम तकिया नहीं है। प्रेम तो जीवट है, संघर्ष है। वस्तुतः अध्यात्म बल की ही साधना है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org