जिन्हें ईर्ष्या में न जलना हो, वो हृदय में स्थापित होकर जिएँ।

और जिन्हें ईर्ष्या में जलना हो, वो ज़माने के साथ जुड़कर जिएँ — वो सदा तरक़्क़ी की दौड़ में ही आगे दौड़ते रहेंगे।

जब आगे बढ़ेंगे तो डरेंगे कि पीछे वाला आगे न निकल जाए।

और पीछे होंगे तो ईर्ष्या में जलेंगे-भुनेंगे, तमाम तरह की ग्रंथियों के शिकार हो जाएँगे।

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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