जानवरों के प्रति संवेदना

चूक यह हो रही है कि तुम्हारी वेदना बहुत स्थूल है। पहली बात तो — वेदना तब उठ रही है जब जानवर मर ही जाए, उससे पहले नहीं उठ रही। और दूसरी बात — सिर्फ़ उस जानवर के लिए उठ रही है जो तुम्हारी आँखों के सामने मरा पड़ा है। अभी दो-चार दिन पहले मैंने सबको एक आंकड़ा बताया था। मैंने कहा था कि प्रति-मिनट तीन लाख जानवर मारे जा रहे हैं। तब वेदना नहीं उठ रही थी तुमको? यह बड़ी स्थूल वेदना है। किसी को कष्ट मिल रहा है तो वेदना नहीं उठ रही, पहली बात तो उसे मरना चाहिए। और दूसरी बात, “उसे आँखों के सामने मरना चाहिए, तब हम में वेदना उठेगी!” जितनी देर में मैंने तुमसे यह बात करी, इतनी देर में डेढ़ लाख जानवर कट गए। वेदना उठी? हाँ?

तो असली वेदना तब होगी जब लगातार याद रखो कि हमारी यह पूरी सभ्यता, पूरी प्रगति, यह सब अरबों जानवरों की लाश पर खड़े हुए हैं। और इसीलिए इंसान कभी भी चैन से जी नहीं पाएगा।

तुम्हारा ऐसा कुछ नहीं है जो लाखों-करोड़ों जानवरों को मारकर नहीं आता हो, कुछ भी नहीं है। प्रतिपल जब वेदना तुम्हारे मन को मथ डाले, तब तुम्हारी वेदना सच्ची हुई और तब तुम्हारी वेदना कर्म में परिणीत होगी। लगातार याद रखना — इंसान की सारी प्रगति इंसान का सारा ओहदा प्रकृति के विनाश पर आधारित रहा है; और छोटा-मोटा विनाश नहीं!

और दूसरी बात — तुम लगा तो दोगे, लेकिन इस बात का भी आश्वासन दे रहे हो कि वह सब बड़े होंगे? तीसरी बात — तुम लगाओगे तो अपने हिसाब से चुनकर लगाओगे कि कौन-सी प्रजाति लगा रहे हो, और प्रकृति जब पेड़ लगाती है तो वह पेड़ लगाती है जो उस भूमि, उस जगह के अनुकूल होता है। तुम तो वहाँ जाकर लगा दोगे — बबूल और कीकर, क्योंकि वही आसान होते हैं। तब हृदय में वेदना उठनी चाहिए कि — “यह क्या है?”

पानी, खाना, घर, दवाईयाँ, बिजली — यह सब आ रहा है कितने ही प्राणियों की लाश से। और ऐसा भी नहीं है कि वह सब तुम्हारे पीठ-पीछे अनजाने में ही कट जाते हैं। अभी हमने कहा कि तीन-लाख तो प्रति मिनट खाने के लिए कटते हैं। इनको तो मत कह दो कि — “अनजाने में कट रहे हैं,” इनको तो जानबूझकर तुम अपने भोजन के लिए काट रहे हो।

अपनी इस वेदना को खिल जाने दो, पूरा हो जाने दो, भीतर तक उतर जाने दो — चाकू बस अभी ज़रा-सा घाव दे रहा हो, खरोच रहा हो, कुछ बूंद ख़ून निकाल दे रहा हो, तो चाकू को दिल में पूरा गहरा उतर जाने दो।

फिर हो सकता है परमात्मा पशुओं की मृत्यु के माध्यम से ही तुम्हारा परिवर्तन कर देना चाहता हो।

वेदना खाली नहीं जाती, वेदना में बड़ी ताक़त होती है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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