ज़िंदगी कमीनी है, किसी को नहीं छोड़ती, इसलिए मुस्कुराओ

बेपरवाह जियो और बुलन्द जियो।

ज़िन्दगी कमीनी है, किसी को नहीं छोड़ती।
इसलिए मुस्कुराओ!

सुख आदि झूठी बातें, ढ़कोसला,
यहाँ सुख किसको मिलना है?
इसलिए मुस्कुराओ!

ये ऐसी लड़ाई है जिसमें पिटोगे भी
और मारे भी जाओगे।
निश्चित है नतीजा।
इसलिए मुस्कुराओ!

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org