जब मन पर भावनाएं और वृत्तियाँ छाने लगे

प्रश्नकर्ता: भावनाओं से अनछुए नहीं रह पाती हूँ। विवेक कहता है कि भावनाओं को देखो, उनसे प्रभावित नहीं हो लेकिन फ़िर भी मैं प्रभावित हो जाती हूँ। कभी चिल्ला देती हूँ, कभी रो देती हूँ, तो इससे कैसे निजात पाएं कि मन एकदम स्थिर हो जाए।

आचार्य प्रशांत: दो तरीके हैं या तो यह देख लो कि यह जो रोना हो रहा है, चिल्लाना हो रहा है यह सब देह के कारण हैं। प्रकृति की बात है, मनुष्य की देह धारण करी है, स्त्री की…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org