जब प्यार किया तो डरना क्या

जो पहली ताक़त मन के ऊपर काम करती है वो उसकी जीव-वृत्ती या मृत्यु-ग्रंथि की है। समय ने आदमी का, जीव का निर्माण किया है। प्राकृतिक विकास की एक लम्बी प्रक्रिया से गुज़र करके जीव उस रूप में आया है जिस रूप में तुम उसे आज देखते हो। समय ने उसका निर्माण किया है इसीलिए वो कहता है कि समय ही मेरा साथी है। वो समय के प्रति उपकृत अनुभव करता है। वो समय का एहसान मानता है। वो कहता है, “मुझे जो मिला, समय से मिला।” और उसकी बात भी ठीक है। तुम्हें नाक, कान, हाथ…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org