जब आलस के कारण कुछ करने का मन न हो!

जब आलस के कारण कुछ करने का मन न हो!

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आजकल कुछ भी मन नहीं करता करने क — न धन के लिए, न ध्यान के लिए। आलस से भरा रहता हूँ। कुछ कहें।

आचार्य प्रशांत: कौन कह रहा है कि मन कुछ भी करने का नहीं करता? आलस करने का नहीं करता? मन यदि कुछ नहीं कर रहा है तो आलस कौन कर रहा है? ये कैसा वक्तव्य है? जो ध्यान के लिए भागे, सो मन सतोगुणी — आपने कहा, “ध्यान का मन नहीं करता”। जो धन के लिए भागे, सो मन रजोगुणी — आपने कहा, आप धन के लिए भी…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org