जनता जागृत होगी तो देश बदलेगा, तंत्र बदलेगा, नेता बदलेंगे, अफसर बदलेंगे, सब बदलेगा।

और जनता को जागृत किए बिना जो लोग चाहते हैं कि व्यवस्था बदल दें, तंत्र बदल दें, वो सपने ले रहे हैं, उन्हें सपने लेने दो।

मैं यहाँ बैठकर क्या कर रहा हूँ असल में?

मैं यहाँ बैठकर असल में कलेक्टर, कमिश्नर, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री — इन सबको बदलने की एक छोटी-सी कोशिश कर रहा हूँ।

आप बदलोगे तो आपके माध्यम से सब बदल जाएंगे।

यहाँ बैठकर हम सब सामूहिक रूप से कोशिश कर रहे हैं इस वक्त कि पूरी दुनिया बदल जाए।

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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