छवि तुम्हारी

मुझ से तुम्हारा परिचय,
सिमट कर रह गया
बस एक क्षण तक का,
और बसी है मेरी आँखों में,
बस उसी क्षण की,
एक,
छवि तुम्हारी ।

और,
संतुष्ट हूँ मैं।

उस एक क्षण से
आगे जाना भी नहीं चाहता
क्योंकि डरता हूँ
आगे जाने में
छिन न जाए मुझ से,
सलोनी वही
छवि…

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

793 Followers

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org