चालाक आदमी को उसकी चालाकी ही भारी पड़ती है

चालाक आदमी को उसकी चालाकी ही भारी पड़ती है

आचार्य प्रशांत: देखो, अंधविश्वास आज के ज़माने में बहुत आगे नहीं बढ़ सकता है। विज्ञान इतना फैला हुआ है कि अब अंधविश्वासी होने का कोई वास्तविक डर बचा नहीं है, या है भी तो बहुत कम है। आज अन्धविश्वाश से कहीं ज़्यादा बड़ा जो ख़तरा है वह ख़तरा है अश्रद्धा का। आप कहते हो कि, “मुझे अन्धविश्वाशी नहीं होना, लेकिन करियर में आपका पूरा विश्वास है”, यह अंधविश्वास नहीं है?

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org