चार-पाँच औरतों से एक साथ प्यार!

क्या फर्क़ पड़ता है कि तुम एक के साथ हो या पाँच के साथ हो? तुम एक के साथ थे तो भी अतृप्त थे, पाँच के साथ थे, तो भी अतृप्त थे, तुम पाँच-हज़ार कर लो तुम तब भी खाली ही रहोगे। हम किसी के पास बाँटने के लिए थोड़े ही जाते हैं, हम तो लेने के लिए जाते हैं; नोचने, खसोटने, चूसने, निचोड़ने के लिए जाते हैं। और दूसरे से तुम्हें जो मिलना है वो कभी काफी पड़ना नहीं है। तो एक का शोषण कर लोगे फिर दूसरी के पास जाओगे या दूसरे के पास जाओगे, फिर तीसरे के पास…

--

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

More from Medium

What Does It mean For a Pregnant Girl to Return to School Post-Lockdown in Uganda?

My Speed Dating Meet Cute Led to Long-term Love

What To Do About The People You Disagree With

A billion reasons not to get a colonoscopy.