गॉसिप ही ज्ञान है

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपकी किताब ‘कर्म’ खरीदने मैं नोएडा के एक बुकस्टोर गया, तो वहाँ के मैनेजर से बात होने लगी। तो बातचीत में एक-दो चीज़ें निकल कर आई। पहली, पिछले पाँच-सात सालों में किताबों की कुछ कैटेगिरी (श्रेणी) ही गायब हो गई है बुकस्टोर से, फिलोसॉफी (दर्शनशास्त्र) और स्प्रिचुएलिटी सेक्शन (आध्यात्मिक खण्ड) एकदम पतला हो गया है। और दूसरी चीज़ ये निकल कर आई कि ज़्यादा जो आजकल किताबें बिक रही हैं, वो लाइट वेट (हल्की-फुल्की) हैं, मनोरंजन, एंटरटेनमेंट की…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org