गॉसिप ही ज्ञान है

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपकी किताब 'कर्म' खरीदने मैं नोएडा के एक बुकस्टोर गया, तो वहाँ के मैनेजर से बात होने लगी। तो बातचीत में एक-दो चीज़ें निकल कर आई। पहली, पिछले पाँच-सात सालों में किताबों की कुछ कैटेगिरी (श्रेणी) ही गायब हो गई है बुकस्टोर से, फिलोसॉफी (दर्शनशास्त्र) और स्प्रिचुएलिटी सेक्शन (आध्यात्मिक खण्ड) एकदम पतला हो गया है। और दूसरी चीज़ ये निकल कर आई कि ज़्यादा जो आजकल किताबें बिक रही हैं, वो लाइट वेट (हल्की-फुल्की) हैं, मनोरंजन, एंटरटेनमेंट की दुनिया से हैं। मैं लम्बे समय से किताबें पढ़ता हूँ, और आज से तीस-चालीस साल पहले ऐसा नहीं होता था। बुकस्टोर मंदिर जैसा होता था और बुकस्टोर में जाओ तो वहाँ पर अध्यात्म की, दर्शन की, तमाम तरह के अच्छे साहित्य की पुस्तकें रहती थीं, अभी वो सब नहीं हैं।

आचार्य प्रशांत: हाँ, बात बिलकुल ठीक है। अभी आप अगर किताबों की दुनिया में देखेंगे तो वहाँ हालत ये है कि वहाँ लेखक को नहीं पढ़ा जाता। वहाँ पहले आपको एक सेलिब्रिटी होना चाहिए, वो भी अधिकांशतः मनोरंजन की ही दुनिया से, जिसमें खेल और सिनेमा वगैरह आ गए, और फ़िर आपकी किताब छपेगी तो वो किताब पहुँच जाती है बुकस्टोर पर।

और आप बुकस्टोर पर जाएँगे तो वहाँ पर आपको तस्वीरें दिखाई देंगी उन लोगों की जिनकी किताबें आजकल बिक रही हैं, वहाँ तस्वीरें आपको लेखकों की नहीं दिखाई देंगी। आज के अच्छे लेखक कौन हैं, इसका तो बहुत कम लोगों को नाम भी पता हो। बहुत कम लोगों को पता होगा। अगर पूछा जाए कि आज भारत में या विश्व में आप शीर्ष पाँच-दस अच्छे लेखकों के नाम बता दीजिए, जो विशुद्ध लेखक मात्र हैं, आप नहीं बता पाएँगे। तो बुकस्टोर पर आप तस्वीरें भी किसकी लगी हुई देखते हैं? वहाँ आप देखेंगे कि सिने एक्ट्रेसेस (फ़िल्मी तारिकाएँ) हैं जो बता रही हैं कि प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) कैसे हैंडल करनी चाहिए। कोई बता रही है कि उसने किस तरीके से दो-चार शादियाँ करी या बिना शादी करे ही क्या करा।

वैसी किताबें बाहर बिलकुल डिस्प्ले में लगी हुई होंगी कि आपको बाहर से देखने पर लगेगा ही नहीं कि ये किताबों की दुकान है। वो आपको लगेगा कि ये बॉलीवुड का कोई शो रैक है, जिसमें बॉलीवुड वाले नहीं तो क्रिकेटर होंगे, नहीं तो राजनेता, राजनेता नहीं होंगे तो उनकी बीवियाँ होंगी या पूर्व-पत्नियाँ होंगी। ऐसे लोग होंगे जिनके नाम आप पहले से जानते हैं। जिनका लेखन से, साहित्य से कोई ताल्लुक़ नहीं है। वो किसी और वजह से उनके नाम आप जानते हैं, तो फिर वो किताबें लिख रहे हैं जिनको आप पढ़ने पहुँच जाते हो। जैसे कि अगर कोई बहुत अच्छी आइटम गर्ल थी तो अब वह एक बहुत गहरी लेखिका बन जाएगी। जैसे कि कोई एक पुराना क्रिकेटर है, वह किताब लिखे और आप कहें, “वाह! इसमें से तो हीरे-मोती निकलेंगे बिलकुल अंदर से एकदम।”

आप जाइए बुकस्टोर्स पर तो आपको बड़ा मुश्किल होगा कि रमण महर्षि और कृष्णमूर्ति की किताबें मिल जाएँ। बहुत मुश्किल होगा। मैं अभी फिलोसॉफी में पूछने लग जाऊँ कि डेरिडा और शोपेनहौर, तो वो तो बहुत…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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