गॉसिप — व्यर्थ चर्चा- मेरे जीवन का हिस्सा क्यों?

तुम मुझे इतना बता दो कि तुम जब गॉसिप करते हो, तो अपनी समझ से करते हो, अपनी इंटेलिजेंस से करते हो, अपने होश से करते हो? या तुम्हारी प्रोग्रामिंग ही है गॉसिप करने की? ठीक- ठीक बताना। ईमानदारी से देखो, क्योंकि अगर तुम्हारी प्रोग्रामिंग नहीं है, तो तुम्हारे पास ये विकल्प होना चाहिए कि- “आओ दोस्तों आज दस लोग बैठेंगे, और आज मौन बैठेंगे, उसमें भी बड़ा आनन्द है।”

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org