गृहिणी के लिए बाधा क्या?

तुम्हारी जो पूरी गति हो रही है किसकी ख़ातिर हो रही है? कौन बैठा है उस गति के केंद्र में? किसको तुम सबसे अधिक महत्त्व दे रहे हो? प्रथम कौन है तुम्हारे लिए? महत्त्वपूर्ण, केंद्रीय कौन है तुम्हारे लिए? यही देखना होता है।

कोई अपने दफ़्तर के चक्कर काट रहा है, और कोई गृहिणी है, वो घर के कमरों के ही चक्कर काट रही है। दोनों में कोई विशेष अंतर नहीं है। एक ने केंद्र में रखा हुआ है पैसे को, और दूसरे ने केंद्र में रखा हुआ है परिवार…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org