गुरु से मन हुआ दूर, बुद्धि पर माया भरपूर

माया दीपक नर पतंग, भृमि-भृमि मांहि परंत।
कोई एक गुरु ज्ञान ते, उबरे साधु संत।।

~ कबीर साहब

आचार्य प्रशांत: पतंगे को भ्रम क्या हो गया है?

श्रोता १: अग्नि ही भ्रम है।

आचार्य: हाँ, चलिए ऐसे बोलिए। आगे?

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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