गलत ज़िंदगी जीने का चलान

काश कोई ऐसी व्यवस्था हो पाए जो गलत ज़िंदगी जीने का चालान काटे।

तुम्हें पता तो चलेगा कि तुम कदम-कदम गलत उठा रहे हो।

तुम गलत लेन में गाड़ी चलाते हो तो चालान कट जाता है, मैं कहता हूँ तुम गलत दोस्तों के साथ गाड़ी में बैठे हो इसपर भी चालान कटना चाहिए।

लेकिन ऐसा कोई नियम हो नहीं सकता क्योंकि आदमी के भीतर के गोरिल्लेपन को नापने की कोई मशीन हमारे पास है नहीं। नहीं तो चालान देने में ही आपकी सारी

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org