खोजना है खोना, ठहरना है पाना

हरि रासि मेरी मनु वणजारा सतिगुर ते रासि जाणी ।

-( श्री गुरु ग्रंथ साहिब)

अनुवाद : प्रभु हैं मेरा धन; मेरा मन है व्यापारी

वक्ता: हरि रासि मेरी मनु वणजारा सतिगुर ते रासि जाणी ।

बहुत सुन्दर पद है, समझेंगे। तीन हिस्से कर लीजिये।

१. हरि रासि मेरी

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org