क्रोध और ईर्ष्या से कैसे बचें?

जब ईर्ष्या का और क्रोध का आक्रमण होने वाला होगा तो तुम्हें बिल्कुल इच्छा नहीं करेगी कि कुछ ऐसा करूँ कि जो तुम्हें शान्ति की ओर ले जाता हो। वही मौक़ा है सतर्क रहने का और चूकने का।

असल में अपनी मुक्ति के लिए अपने ख़िलाफ़ जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। जो अपने ख़िलाफ़ नहीं जा सकता, वो मुक्ति को भूल ही जाये। बात थोड़ी विचित्र सी है। अपने को पाने के लिए, अपने ही विरुद्ध जाना पड़ता है। और है ऐसा ही।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org