क्यों नहीं मिल सकते भारत को अच्छे नेता?

आचार्य प्रशांत: प्रश्न है कि “क्यों नहीं मिल सकते भारत को अच्छे नेता?”

यहाँ ‘नेता’ लिखा है, मैं समझता हूँ कि राजनैतिक क्षेत्र की बात की जा रही है, तो राजनेताओं की ही बात की जा रही होगी; क्योंकि नेतृत्व तो वरना किसी भी क्षेत्र में हो सकता है, पर यहाँ पर शायद पॉलिटिकल (राजनैतिक) क्षेत्र की ही बात हो रही है।

देखो, जनतंत्र है भई! यहाँ पर ऐसा तो है नहीं कि कोई ताक़त के दम पर या अपनी फ़ौज के दम पर आ कर के चढ़ बैठता है और तुम्हारा मुखिया बन जाता है या प्रधान बन जाता है, यहाँ तो गद्दी उसको ही मिलती है जिसको तुम चुनते हो। तो एक बहुत प्रसिद्ध (वक्तव्य), अंग्रेज़ी में है, कि “पीपल गेट द लीडर्स दे डिज़र्व।” (लोग जैसे होते हैं, उन्हें उसी तरह का नेता मिलता है) और ये बात लोकतंत्र में तो शत-प्रतिशत लागू होती है। तो ये प्रश्न कैसा है फिर, कि “क्यों नहीं मिल सकते भारत को अच्छे नेता”?

भारतीय जैसे हैं, भारतीयों को वैसे नेता मिल जाते हैं। नेता कोई धाँधली कर के तो सत्ता पर काबिज़ होते नहीं, बाक़ायदा मतगणना होती है; जिसको ज़्यादा मिले हैं वोट उसको गद्दी मिल जाती है। तो आप ही तो दे रहे हैं, और आप भारतीय हैं; आप जिस आधार पर मत अपना दर्ज़ कराते हैं, उसी तरीके से लोग सत्ता पर पहुँच जाते हैं। वैसे ही अंग्रेज़ी का एक और (वक्तव्य) याद आ रहा है, कि, “दुनिया-भर में क्या होता है कि पीपल कास्ट देयर वोट; इन इंडिया, पीपल वोट देयर कास्ट (लोग अपना मत देते हैं; भारत में, लोग अपनी जात वालों को मत देते हैं)।“ फिर आप कहते हैं कि भारत को अच्छे नेता क्यों नहीं मिल रहे। जब तक…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org