क्यों जीना पड़ता है स्त्रियों को मजबूरी में?

सब भावनात्मक निर्भरता पदार्थगत होती है। दैट व्हिच यू कॉल्ड इमोशन, इज़ मोस्टली इकोनॉमिक्स।

कुत्ता होता है न? कल माता जी मुझसे कह रही थीं कि “कुत्ता अगर पालना तो रोटी उसे तुम ही देना। भले ही उसे बहुत लोग खिलाएँ या कुछ भी करें, पर रोटी अपने ही हाथ से देना। कुत्ता तुमसे भावनात्मक रूप से जुड़ जाएगा।” क्यों — इमोशन इज़ मोस्टली इकोनॉमिक्स।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org