क्या है ढ़ाई आखर प्रेम का?

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय । ।

~ कबीर साहब

‘प्रेम’ माने — चाह। ज्ञान माने — पता होना कि रास्ता कैसा है।

ज्ञान माने पता होना कि तुम्हारा वाहन कैसा है। ज्ञान माने पता होना कि तुम्हारे पास संसाधन क्या-क्या हैं, क्या तुम्हारी शक्ति है, क्या तुम्हारी सीमा है; तेल कितना है तुम्हारी गाड़ी में…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org