क्या है जो बदलता रहता है, और क्या जो कभी नहीं बदलता?

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्।।

~ (श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय २ श्लोक १२)

भावार्थ: ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं किसी भी समय में नहीं था, या तू नहीं था अथवा ये समस्त राजा नहीं थे और ना ऐसा ही होगा कि भविष्य में हम सब नहीं रहेंगे।

प्रश्नकर्ता: ये एकदम ऐसा प्रश्न है जो हर देश, काल, हर टाइम-फ्रेम में एकदम सटीक होता है। इसमें भगवान ने सब बातें कह दीं। इसी में कह दीं। कहा कि हर युग में तुम रहोगे, मैं रहूँगा, ये सब सिस्टम रहेगा, ये…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org