क्या सिखाना चाहती है कोरोना महामारी?

प्रकृति का क्रूर दोहन,
विकास की खोखली परिभाषा,
उपभोग की अंतहीन कामना,
ये आम आदमी का जीवन है।
सब देशों-समाजों का अंधा आदर्श है।

जिस राह हम चल रहे हैं,
भीतर से तो रोज़ मर ही रहे थे,
अब बाहर भी मौत नाच रही है।

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org