क्या सब कुछ भाग्य के ही अधीन है?

जो कुछ बाहर से आ रहा है वो तो भाग्य के ही अधीन है, आप उस पर कोई नियंत्रण नहीं कर सकते। इसका अर्थ ये नहीं है कि किसी भी चीज़ पर आपका बस नहीं है।

आदमी उन चीज़ों को नियंत्रित करना चाहता है, उस आयाम में सुरक्षा पाना चाहता है जहाँ किसी तरह की कोई सुरक्षा हो नहीं सकती। अगर आप इस झूठी कोशिश से बच जाए तो फिर आप अपनी ऊर्जा वहाँ लगाएगे जहाँ पर आप की ऊर्जा फलदाई होगी।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org