क्या विवेकी मन भी कभी विचलित और आसक्त होता है?

विवेक की आवश्यकता गुणों की उपस्थिति में ही पड़ती है न? मुक्त पुरुष के लिए विवेक का क्या काम? तुम अवधूत गीता के पास जाओ, तुम अष्टावक्र गीता के पास जाओ, वो स्पष्ट कहते हैं, विवेक की ज़रूरत ही क्या है? लेकिन ये बातें आम-आदमी के लिए नहीं है, ये बातें सिर्फ उनके लिए हैं जो मुक्त हो गए। इनको उपदेश मत मान लेना, ये बस अपनी हालत बयान की गई है, ये तुम्हें इसलिए बताई गयी है ताकि तुम आकर्षित हो सको।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org