क्या वासनाओं का दमन आवश्यक है?

प्रश्नकर्ता (प्र): आचार्य जी, क्या वासनाओं का दमन आवश्यक है?

आचार्य प्रशांत (आचार्य): दबाना भी एक विधि है। शम-दम ये भी आवश्यक होते हैं। वासनाएँ तो भीतर बहुत समय तक बनी रहेंगी, निर्बीज नहीं हो जाओगे। और तुम ये इंतज़ार नहीं कर सकते कि जब वासनाएँ समूल नष्ट हो जाएंगी सिर्फ तभी तुम वासना मुक्त जीवन जीओगे। तो वासनाओं के दमन का भी अध्यात्म में बड़ा स्थान है। शमन-दमन आना चाहिए। दमन पर्याप्त नहीं है पर दमन आवश्यक ज़रूर…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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